हमारी कहानी
विचार, विमर्श और साहित्य का संगम
हमारा उद्देश्य हिंदी बालसाहित्य ज्ञान और गुणवत्ता की कोई सीमा न हो
हमारा दृष्टिकोण (Vision)
बालवाटिका का दृष्टिकोण हिंदी भाषा को वैश्विक डिजिटल पटल पर अग्रणी बनाना है। हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा के साहित्य को गर्व और सहजता के साथ पढ़ें।
हमारा लक्ष्य (Mission)
हमारा लक्ष्य एक विश्वस्तरीय डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण करना है जो उच्च गुणवत्ता वाली, त्रुटिहीन और सुंदर ढंग से स्वरूपित हिंदी ई-बुक्स प्रदान करें
डॉ. भैरूँलाल गर्ग
संपादक
"हमारा सपना है कि हर बच्चे और पाठक को श्रेष्ठ हिंदी बालसाहित्य पढ़ने का अवसर मिले। बालवाटिका इसी दिशा में हमारा एक छोटा सा लेकिन दृढ़ कदम है। डिजिटल युग में हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।"
वेदांत प्रभाकर
संस्थापक एवं स्वत्वाधिकारी
प्रबंध संपादक
वेदांत प्रभाकर बालवाटिका के डिजिटल और संपादकीय विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पत्रिका उच्च गुणवत्ता वाले बालसाहित्य को आधुनिक पाठकों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यात्रा
हमारा इतिहास
1996
बालवाटिका की स्थापना
मार्च 1996 में डॉ. भैरूँलाल गर्ग द्वारा 'बालवाटिका' का प्रकाशन एवं संपादन प्रारम्भ किया गया।
1996 – वर्तमान
निरंतर प्रकाशन
बालवाटिका निरंतर प्रकाशित हो रही है और हिंदी बालसाहित्य की प्रमुख पत्रिकाओं में से एक है।
वार्षिक
राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठियाँ
प्रतिवर्ष राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। अब तक 26 राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं।
2026
344 प्रकाशित अंक
सितंबर 2026 तक 344 अंक प्रकाशित हो चुके हैं तथा अनेक विशेषांक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे हैं।
1,500+
प्रीमियम ई-बुक्स
10k+
सक्रिय पाठक
120+
प्रसिद्ध लेखक
4.9
औसत रेटिंग