विचार, विचारों और साहित्य का संगम
हिंदी बालसाहित्य की प्रमुख डिजिटल पत्रिका
ज्ञान • विचार • साहित्य

विचारों से
भविष्य का निर्माण

बालवाटिका हर माह प्रकाशित होने वाली प्रीमियम हिंदी डिजिटल पत्रिका है जो साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित है।

31वाँ वर्ष

प्रकाशन का यह इकतीसवाँ वर्ष है

मार्च 1996 से शुरू

344 अंक

सितंबर 2026 तक

344 अंक प्रकाशित

1000+ पाठक

पाठक परिवार

हमारे साथ जुड़े पाठक

100% मौलिक रचनाएँ

गुणवत्ता हमारी पहचान

हमारी यात्रा

हर कदम बालसाहित्य की ओर

बालवाटिका की यात्रा समर्पण, साहित्य और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की यात्रा है।

हमारे बारे में जानें
1996
बालवाटिका की स्थापना

मार्च 1996 में डॉ. भैरूँलाल गर्ग द्वारा 'बालवाटिका' का प्रकाशन एवं संपादन प्रारंभ किया गया।

1996 – वर्तमान
निरंतर प्रकाशन

बालवाटिका निरंतर प्रकाशित हो रही है और हिंदी बालसाहित्य की प्रमुख पत्रिकाओं में से एक है।

वार्षिक
राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठियाँ

प्रतिवर्ष राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठियों एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है । अब तक 26 संगोष्ठियाँ सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं।

2026
344+ प्रकाशित अंक

सितंबर 2026 तक 344 से अधिक अंक प्रकाशित हो चुके हैं तथा अनेक विशेषांक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं।

समृद्ध साहित्य

कहानियाँ, कविताएँ, लेख, संस्मरण और बहुत कुछ

विशेषांक संग्रह

भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्य और बालसाहित्य पुरोधा पर विशेषांक

किशोर साहित्य

बालोपयोगी और किशोरोंपयोगी साहित्य का भंडार

श्रेष्ठ रचनाकार

देश के प्रतिष्ठित रचनाकारों की श्रेष्ठ एवं मौलिक रचनाएं

विश्वसनीय मंच

मौलिक, प्रेरणादायक और सकारात्मक साहित्य का मंच

ताज़ा अंक
Current Issue Cover
सितंबर 2026 अंक 344

सितंबर 2026 अंक – विशेषताएँ

  • शिक्षा एवं शिक्षक विशेषांक – शिक्षा, शिक्षक के व्यक्तित्व, शिक्षार्थियों तथा शिक्षक-समाज संबंधों पर केंद्रित विशेष सामग्री।
  • प्रकाशन का 31वाँ वर्षबालवाटिका की गौरवशाली प्रकाशन यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव।
  • संपादकीय“शिक्षक व्यक्तित्व-निर्माण के मुख्य आधार हैं” — डॉ. भैरूँलाल गर्ग।
  • विशेष लेख“हिंदी दिवस की सार्थकता एवं व्यापकता”, “शिक्षक : समाज के सौंदर्य का वाहक”, “शिक्षा, शिक्षार्थी और शिक्षक” तथा “डॉ. राधाकृष्णन-व्यक्तित्व और कृतित्व”
  • प्रेरक कहानियाँमेधना गाँव का कलाकार, मास्टर साहब, नेक कामों की खुशबू, मैं हिंदी हूँ..., गुरु ज्ञान तथा टोट्टी और गोपाल जैसी रोचक एवं शिक्षाप्रद कहानियाँ।
  • बाल साहित्य – कविताएँ, एकांकी, यात्रा-वृत्तांत एवं संस्मरण के साथ विविध रचनात्मक बाल-साहित्य।
  • एकांकी विशेष“खोया हुआ शब्द”
  • यात्रा-वृत्तांत“बाबा धाम” के माध्यम से ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक यात्रा-अनुभव।
  • पुस्तक समीक्षा – हिंदी साहित्य एवं बाल-साहित्य से संबंधित पुस्तकों की समीक्षाएँ और साहित्यिक परिचर्चा।
  • अन्य आकर्षणगतिविधियाँ, चिट्ठी आई है, आवरण तथा साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री।
  • विशेष जानकारी – शिक्षा, शिक्षक-धर्म, हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध सितंबर 2026 का 60-पृष्ठीय अंक

अनुक्रम के अनुसार अंक में कविता, कहानी, लेख, एकांकी, यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण, पुस्तक समीक्षा और गतिविधियाँ जैसी प्रमुख विधाओं को स्थान दिया गया है।

निःशुल्क पाठकों के लिए केवल 3 पृष्ठों का प्रिव्यू उपलब्ध है।
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पाठकों की राय

"‘बालवाटिका' केवल बाल साहित्य की एक पत्रिका ही नहीं, एक जाग्रत ऋषि का, तपस्वी का स्वप्न भी है। और उस ऋषि, इस तपस्वी का नाम है भैरूँलाल गर्ग। पिछले जमाने में ऋषि और साधक वन-वन भटकते ...और पढ़ें"

डॉ. प्रकाश मनु
डॉ. प्रकाश मनु
वरिष्ठ बाल साहित्यकार

"गर्ग साहब को जो मान-सम्मान बाल साहित्य जगत और पत्रकारिका जगत ने प्रदान किया है, उसका कारण है उनका 'बालवाटिका' को बाल साहित्य के साथ बाल विमर्श की पत्रिका बनाना। गर्ग साहब की साधना ...और पढ़ें"

डॉ. शकुंतला कालरा
डॉ. शकुंतला कालरा
वरिष्ठ बाल साहित्यकार

"बालवाटिका आज बाल साहित्य के मुक्त गगन में अपने पंख पसारे किसी समर्थ चिड़िया सी चहचहा रही है। बालवाटिका का हर अंक गर्ग जी की दूरदृष्टि की अभिव्यक्ति करता है। हर अंक का अनुक्रम, गागर...और पढ़ें"

डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
वरिष्ठ बाल साहित्यकार

"सन 1996 से आज तक यानी 30 वर्षों से डॉ. भैरूँलाल गर्ग 'बालवाटिका' जैसी बाल साहित्य विमर्श की अनूठी और अद्भुत मासिक पत्रिका का संपादन-प्रकाशन कर रहे हैं। किसी भी संस्था के सहयोग के ब...और पढ़ें"

बुलाकी शर्मा
बुलाकी शर्मा
वरिष्ठ बाल साहित्यकार

"आज बालवाटिका नियमित प्रकाशित होकर पाठकों की प्रिय पत्रिका बनी हुई है। संपादक गर्ग साहब प्रकाशित होने वाली रचनाओं को परखकर प्रकाशित करते हैं। बालवाटिका ने अनेक वरिष्ठ बाल साहित्यकार...और पढ़ें"

दिनेश विजयवर्गीय
दिनेश विजयवर्गीय
वरिष्ठ बाल साहित्यकार

"डॉ. भैरूँलाल गर्ग से मेरी एक दो मुलाकात हुई हैं लेकिन बालवाटिका के माध्यम से निरंतर भेंट होती रही है। गर्ग जी बाल साहित्य उत्थान के लिए एक ऋषि की तरह काम कर रहे हैं। जैसे राक्षसों ...और पढ़ें"

गिरीश पंकज
गिरीश पंकज
साहित्यकार

"डॉ. गर्ग के संपादन में तीन दशकों की यात्रा पूरी करने जा रही मासिकी 'बालवाटिका' ने आरंभ से ही हिंदी जगत में जुंबिश पैदा कर एक अलग ही पहचान बनाई है। इस दौर में वही एक मात्र समावेशी प...और पढ़ें"

भगवतीप्रसाद गौतम
भगवतीप्रसाद गौतम
साहित्यकार

"बालवाटिका पत्रिका के बारे में थोड़ी और विस्तृत चर्चा करें तो मुझे लगता है कि यह पत्रिका संपादकीय कुशलता का एक खूबसूरत प्रमाण है। प्रत्येक वर्ष छपने वाले भिन्न-भिन्न चार-पाँच विशेषा...और पढ़ें"

डॉ. दर्शन सिंह आशट
डॉ. दर्शन सिंह आशट
साहित्यकार
साहित्यिक विचार

नवीनतम लेख

बाल साहित्य और बच्चे अभिभावकों का दायित्व
संपादकीय

बाल साहित्य और बच्चे अभिभावकों का दायित्व

इस अंक में विशेष रूप से प्रासंगिक एवं सामयिक संदर्भ की सामग्री देने का प्रयास रहा है। जब आप इस अंक से गुजरेंगे तो पता चलेगा कि यह सामग्री हमारे चालकों के लिए ही नहीं हम सभी के लिए कितनी महत्वपूर्ण है जैसा कि में हर बार यह कहता रहा हूँ कि जिस तरह बालक सभी का है, उसी तरह बाल साहित्य भी सभी का है। इस तरह बालक तक बाल साहित्य पहुँचाने का पाहला दायित्व माता-पिता का है। आशा है चे दुत दुत कर अपने बालकों को श्रेष्ठ बाल साहित्य उपलब्ध करवाएँगे, जिससे कि हमारे बालक राष्ट्र के श्रेष्ठ नागरिक वन सकें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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